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Sunday, October 9, 2011

पिन्डारी की यात्रा कुछ खट्टे मीठे पल

पिन्डारी ग्लेशियर की यात्रा मेरे जीवन के अनुभवों को असली रुप दिखा गयी , नीरज जाट के आमंत्रण पे मै निकल लिया ३० सितम्बर की रात को बाघ इक्स्प्रेस से हल्द्वानी के लिये पूरी रात यात्रा करने के बाद दुसरे दिन सुबह मै पहुचा हल्द्वानी के स्टेशन पर ,वेटिग रुम मे इन्तजार कर्ने लगा अपने सह्यात्री नीरज जात का जिसे आना था दिल्ली से पर १०:३० से ३:३० तक इन्तजार करते करते आखिर मे फोन आया जाट जी का बस अड्डे आ जाओ भाई हम भी अपना बोरिया बिस्तर उठा के चल पडे तकरीबन ३० मिनट इन्तजार के बाद जाट जी का आगमन हुआ हम ने उनसे पुछा क्या हाल है भाई उन्होने पलट के सवाल दाग दिया की आप कहां जा रहे हो मैने कहा जहां आप जा रहे हो यहां आपको बताते चले की ये हमारी पह्ली मुलाकात थी नीरज जाट से आप को बता दे
कि ये मुसाफिर हु यारो  वाले है चलो भाई आगे बढते है नीरज के साथ कोई और भी था स्मार्ट सा दिखने वाला अतुल सिह हम बडे खुश थे पर हमे जल्दी थी बागेश्वर जाने की तलाश करने के बाद इक कार वाले से तय हुआ जो हमे अल्मोडा तक छोड्ने को तॆयार हो गया , रास्ते मे हमे जोर की भूख लगी हमारे कार चालक को भी कुछ एसा ही लगा और हमारी कार रुक गयी इक चाय की दुकान पे और हमने भी अपनी खाने पीने की दुकान खोल दी
 नीरज और अतुल दोनो ने मजे ले लेके पेडे और पुरीयां पनीर की सब्जी का मजा उठाया, फिर चल पडे हम अपनी मजिंल की ओर शाम ७ बजे के आस पास हम अल्मोडा पहुच गये उसके बाद हम निकल पडे हल्द्वानी की यात्रा पे
रास्ते मे इक बडी मजेदार घटना घटी कार वाले को गाना बजाने के लिये मेमोरी कार्ड की तलाश थी मैने बताया की मेरे पास पेन ड्राईव है कार चालक को पेन ड्राईव मिलते ही उसमे जो गाना बजा कि उसे सुनते ही कार चालक को शराब पीने की तलब जाग उठी फिर क्या था हल्द्वानी से अल्मोडा का सफर और शराब का साया अपनी मस्ती मे कार चालक शराब पीते पीते अल्मोडा से कुछ दूर तक पहुच गया हम सडक पे चल ही रहे थे कि इक यात्री चिल्लाया बाघ हम सब थोडा डर गये अरे पर ये क्या हुआ हमारी गाडी आगे की बजाय पीछे जाने लगी , हम सब परेशान बाद मे पता लगा कि कार चालक को बाघ के दर्शन करने थे तो उन्होने बैक गेयर लगा थी ,
खैर किसी तरह हम अल्मोडा पहुच गये रात हमने विवेक होटल मे गुजारी ,हमने रास्ते मे अल्मोडा की मशहूर बाल मिठाई खरीदी थी जिसे खा के पानी पी के हम सो गये,


        १-१०-२०११ को हम सुबह बागेश्वर के टैक्सी स्टैंड पहुचे जहा से हमे सांग जाना था पर कोई भी सीधी गाडी नही मिल रही सो हमने अपनी यात्रा दो हिस्सों मे बांट कर पह्ले भयारी और फिर भयारी से सागं जाने का निश्चय किया लगभग १० बजे के आस पास हम सांग पहुच गये जहां से हमे अपनी पिन्डारी यात्रा की चढाई शुरु करनी थी लगभग १०:२० मिनट के आस पास हम तीन सहयात्री नीरज जाट, अतुल सिह और मै मिर्च नमक या हल्दी राम अतुल के अनुसार तथा इक बगाली बाबू कौशिक बनर्जी ने यात्रा का श्रीगणेश किया
अभी मुश्किल से कुछ कदम यानी २०० से ३०० मीटर चढे थे कि मेरे पावं जवाब दे गये सांसे फूलने लगी और मुझे लगा कि अपना काम तो हो गया हो गयी अपनी पिण्डारी ग्लेशियर की यात्रा तभी नीरज जाट की कड्क्ती आवाज भाई कुछ भी हो जाये तू बैठना नही तू कहे तो मै तेरे पाव पड जाऊ पर मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था कि मै क्या करु तभी इक आवाज आयी इक लड्के की उसने कहा कि मै आप की मदद करना चाहता हू
मै आपका समान ल्रे चलता हु मैने तुरन्त पूछा कि भाई आप क्या लोगे उसने कहा जो आप देना चाहे पर मैने कहा भाई पहले आप तय करलो बाद मे लफ्डा नही चलेगा उसने कहा मै आप कि मदद करुगा जो आप दोगे वो मै रख लुगा खैर उसने मेरा बैग उठा के निकल पडा और मै भी अपनी हिम्मत ................................










शेष कुछ पल के बाद..

3 comments:

  1. क्या संयोग रहा मैं इस दौरान हर की दून व स्वर्गरोहिणी गलेशियर पर था व आप सब इस जगह पर

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  2. हल्दीराम भाई, जरा इस पोस्ट को दोबारा पढो। काफी सारी गलतियां हैं। जैसे कि बागेश्वर की बजाय एक जगह अल्मोडा लिखा है।
    और यात्रा मजेदार रही।

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  3. बहुत अच्छे फोटो .....

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